कैंट क्लेमेंटटाउन में अब लैंड यूज प्लान लागू होगा। बुधवार को हुई विशेष बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव पास हो गया है। इससे यह स्पष्ट होगा कि कौन सा क्षेत्र आवासीय है, कौन सा कृषि क्षेत्र है। कहां तक सेना की जमीन है। अब इससे क्षेत्र में आए दिन सैन्य भूमि को लेकर उठ रहे विवादों पर भी विराम लगेगा।
कैंट क्लेमेंटटाउन में बड़ी संख्या में जमीनें हैं। लेकिन, इनका वर्गीकरण नहीं था। बुधवार को हुई बैठक में कैंट सीईओ अभिषेक राठौर और इंजीनियर बृजेश कुमार गुप्ता ने बोर्ड के सामने लैंड यूज प्लान का प्रस्तुतीकरण दिया। लगभग दो दशक बाद लागू होने वाले इस लैंड यूज प्लान में आवासीय क्षेत्रों, व्यवसायिक क्षेत्रों, कृषि क्षेत्र, सैन्य क्षेत्र व सेना की अतिरिक्त भूमि को अलग-अलग उनके भू उपयोग के रूप में दर्शाया गया है। भविष्य में इसी प्लान के आधार पर कैंट बोर्ड में निर्माण और विकास कार्य होंगे। इस प्लान को बोर्ड ने स्वीकृति दे दी है। सीईओ अभिषेक राठौर ने बताया कि स्वीकृति के लिए उक्त प्लान को मध्य कमान लखनऊ को भेजा जाएगा। मध्य कमान इसे भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय को गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजेगा। बैठक में मुख्य रूप से छावनी परिषद के अध्यक्ष ब्रिगेडियर सुभाष पनवर, कर्नल नवीन मिश्रा, कर्नल अजय सिंह, छावनी परिषद के सभासद भूपेंद्र सिंह कंडारी, रामकिशन यादव, मौ. तासीन अली, टेक बहादुर क्षेत्री, बीना नोटियाल, शाहीना अख्तर आदि मौजूद रहे।
बैठक में क्षेत्र की बदहाली पर उठे सवाल
देहरादून। बोर्ड बैठक में सभासदों ने क्षेत्र में विकास कार्य न होने पर नाराजगी जताई। स्ट्रीट लाइट और सड़कों आदि की समस्याओं को जोरशोर से उठाया गया। सभासद रामकिशन यादव ने पाइपलाइन बिछाने के लिए क्षतिग्रस्त मार्गों का शीघ्र निर्माण की मांग उठाई। इस पर अध्यक्ष ने सचिव को शीर्घ निर्माण करवाने के निर्देश दिए। छावनी परिषद क्लेमेंटटाउन के पूर्व उपाध्यक्ष एवं वर्तमान सभासद भूपेंद्र सिंह कंडारी ने किसी भी वार्ड में स्ट्रीट लाइट न होने का मामला उठाया। इस पर अध्यक्ष ने सीईओ को एक सप्ताह के भीतर समस्त क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट लगाने का कहा। सभासद टेक बहादुर और बीना नौटियाल ने विकास कार्यों को शीघ्र प्रारंभ करने की मांग की। बैठक में समस्त ठेकेदारों की निविदाओं को 31 मार्च तक समय दिया है।
28 आवासीय भवनों के मानचित्र स्वीकृत
बैठक में सीईओ एवं सचिव अभिषेक राठौर ने 28 आवासीय भवनों के मानचित्रों को स्वीकृति के लिए बोर्ड बैठक में रखा। जिनका समस्त सभासदों ने अध्ययन कर मानचित्र को स्वीकृति दी।